नए युग का उदय और सौ साल की योजना

The Nation Talk | Ravinder Singh

Thursday December 5, 2019

नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच महाबलीपुरम में दो दिन की वार्ता की 'सफलता' का अंदाजा लगाने के लिए एक सप्ताह पहले की घटनाओं का स्मरण आवश्यक है। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद चीन ने भारत का विरोध और पाकिस्तान के साथ एकजुटता के प्रदर्शन में कोई कसर नहीं छोड़ी। भारत को याद दिलाया गया कि उसके इस कदम से सीमा विवाद और जटिल हो जाएगा। लद्दाख के संदर्भ में कहा गया कि उस पर भारत के प्रशासकीय अधिकार का चीन ने हमेशा विरोध किया है। भारत पहुंचने के एक दिन पहले शी ने बीजिंग में इमरान खान का स्वागत करते हुए कहा कि कश्मीर के हालात पर चीन चिंतित है। उन्होंने भारत को सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों की याद दिलाई।
महाबलीपुरम में दो दिन की अनौपचारिक वार्ता के बाद मोदी ने कहा, 'अब नए युग का उदय होगा, स्थायित्व बढ़ेगा। वुहान की भावना ने हमारे संबंधों को नई गति और विश्वास प्रदान किया था। हमने तय किया था कि अपने मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेने देंगे, बुद्धिमत्ता से उन्हें निपटाएंगे।' बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, शी ने कहा, 'चीन भारत के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित करने की अडिग नीति पर चल रहा है और दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच रिश्ते मजबूत करने के लिए सौ वर्षीय योजना का प्रस्ताव रखा है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति में वैश्विक स्थिरता और विकास बढ़ाने के लिए भारत और चीन को बढ़ते महत्व की जिम्मेदारी का वहन करना चाहिए। दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका में भारत और चीन को दूसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए।' दक्षिण एशिया अर्थात पाकिस्तान के साथ।

शी की महाबलीपुरम यात्रा 'सफल' होनी ही थी। उन्हें जो दो टूक कहना था, वह चौबीस घंटे पहले कह चुके थे। आपसी विवादों से ग्रस्त, विश्व की दो सर्वाधिक गतिशील अर्थव्यवस्थाओं के नेता एक-दूसरे के देश की यात्रा विफलता हासिल करने के लिए नहीं करते। दोनों देशों के परिपक्व राजनय और व्यक्तिगत रूप से मोदी व शी की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का भी सवाल था। आगे की संभावनाओं और संभावित घटनाक्रम को यथार्थ के धरातल पर देखना चाहिए। पाकिस्तान आतंकवाद का संचालन करता रहे और चीन लद्दाख पर अपना अधिकार जताता रहे, तो सहयोग के लिए छोटा-सा हाशिया भी नहीं बचता।

पाकिस्तान का उदार और तर्कसंगत वर्ग जो बात समझता है,चीन उसे भी तसलीम नहीं करना चाहता। शी के भारत पहुंचने के दिन प्रतिष्ठित पत्रकार नजम सेठी ने फ्राइडे टाइम्स में लिखा, 'सच यह है कि अब दुनिया भारत में कश्मीर के एकीकरण के साथ रहना चाहती है। सच यह है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में अलग-थलग पड़ चुका है। सच यह है कि पाकिस्तान दिवालिया हो चुका है, जबकि विश्व आगे बढ़ रहे भारत को देख रहा है।' उभयपक्षीय संबंधों का भयावह सच यह है कि चीन भारत की सीमाओं को काट-पीटकर रखने की स्थायी नीति पर चल रहा है। भारत चीन के साथ अपनी सीमा की लंबाई करीब 4,000 किलोमीटर मानता है। पर चीन के मुताबिक, यह सिर्फ 2,000 किलोमीटर है, क्योंकि वह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का भाग मानता ही नहीं। भारत की कोई भी सरकार इसकी अनदेखी नहीं कर सकती।

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